📘 शब्द-प्रकार

भाग-A: उत्पत्ति/मूल के आधार पर शब्द

1) तत्सम

परिभाषा: जो शब्द संस्कृत से ज्यों-का-त्यों (बिना ध्वनि परिवर्तन) हिन्दी में आए। जैसे— अग्नि, सूर्य, ज्ञान, कर्म, विद्यालय
पहचान

  • प्रायः देवनागरी में कठिन संधि/समास रूप भी वैसा ही: क्षेत्र, दृष्टि, स्त्री, पृथ्वी

  • उच्चारण में क्ष, ज्ञ, त्र, श्र ज्यों-के-त्यों रहते हैं।
    टिप्स: आधिकारिक/वैज्ञानिक/धार्मिक शब्दावली में तत्सम का वर्चस्व रहता है।


2) अर्ध-तत्सम

परिभाषा: जो शब्द संस्कृत से आये पर हल्के ध्वनि-परिवर्तन के साथ (पूरी तरह तद्भव भी नहीं)। यानी तत्सम ↔ तद्भव के बीच का रूप। जैसे— अग्नि → अगिन (अर्ध-तत्सम) → आग (तद्भव); कार्य → कारज, धैर्य → धीरज। 
पहचान

  • मूल संस्कृत-आधार दिखता है, पर एक-दो ध्वनियाँ बदल जाती हैं: न्य → निज/निज-, य्र्य → रज/रज- इत्यादि।
    उदाहरण-याद रखें

  • अग्नि → अगिन (अर्ध-तत्सम) → आग (तद्भव), कार्य → कारज, धैर्य → धीरज। 
    ध्यान: कई परम्परागत व्याकरण-ग्रन्थ इसे “प्राकृत बोलचाल से बदला हुआ तत्सम रूप” भी कहते हैं।


3) तद्भव

परिभाषा: जो शब्द संस्कृत से प्राकृत/अपभ्रंश होते हुए ध्वनि-रूप बदलकर हिन्दी तक पहुँचे। जैसे— अग्नि → आग, क्षेत्र → खेत, नेत्र → आँख, दुग्ध → दूध, मुख → मुँह। (सामान्य परिभाषा) 
पहचान

  • क्ष → ख/क (क्षेत्र→खेत), ज्ञ→ ज/ग्य/ग (यज्ञ→यग्य/यज), त्र→ त/त् जैसे रूपान्तरण दिखते हैं।

  • रोज़मर्रा की बोलचाल में तद्भव सबसे आम।


4) देशज

परिभाषा: जो शब्द देशी/स्थानीय बोलियों से सीधे हिन्दी में आए, जिनका स्पष्ट संस्कृत-या विदेशी स्रोत नहीं। (उदा. पाठ्यपुस्तकों में मिलते सामान्य उदाहरण) — झोला, टोकरी, छप्पर, लाठी, चूल्हा इत्यादि।

ध्यान: अलग-अलग पुस्तकों में देशज सूचियाँ भिन्न हो सकती हैं; सिद्धान्त यही है—स्थानीय स्रोत, न कि प्रत्यक्ष संस्कृत/विदेशी। (उदाहरण-सूची का स्वरूप सिलेबस/पुस्तक पर निर्भर)


5) विदेशी (आगत) शब्द

परिभाषा: जो शब्द अरबी-फ़ारसी/अंग्रेज़ी/पुर्तगाली आदि विदेशी भाषाओं से आए।
पहचान

  • क़, ख़, ग़, ज़ (बिंदु/नुक्ता) वाले शब्द प्रायः अरबी-फ़ारसी मूल: क़लम, क़मीज़, ग़रीब, ज़मीन

  • अंग्रेज़ी से: स्कूल, डॉक्टर, स्टेशन, पुलिस, टेबल
    टिप्स: प्रश्न-पत्र में “विदेशी” पहचानने का सबसे तेज़ संकेत—नुक्तायुक्त ध्वनियाँ


🔁 तुलनात्मक सारणी (उत्पत्ति-आधारित)

Sanskrit मूल तत्सम अर्ध-तत्सम तद्भव
अग्नि अग्नि अगिन आग
कार्य/कर्म कार्य/कर्म कारज काम/काज (प्रचलित रूप)
धैर्य धैर्य धीरज
क्षेत्र क्षेत्र खेत
नेत्र नेत्र आँख

स्रोत-आधारित व्याख्या/उदाहरणों का सार:


भाग-B: व्याकरणिक आधार पर शब्द-भेद (Parts of Speech)

1) संज्ञा (Noun)

परिभाषा: व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण/भाव आदि के नाम बताने वाले शब्द।
मुख्य प्रकार

  • व्यक्तिवाचक: अशोक, दिल्ली, हिमालय

  • जातिवाचक: लड़का, नदी, पर्वत

  • भाववाचक: ईमानदारी, सुंदरता, ज्ञान

  • द्रव्यवाचक: जल, दूध, सोना
    पहचान-ट्रिक: जिनके आगे यह/वह/ये/वे लगा कर संदर्भित कर सकें—अक्सर संज्ञा।
    परीक्षा-ध्यान: लिंग, वचन, कारक, वचन-परिवर्तन पर छोटे प्रश्न बनते हैं।


2) सर्वनाम (Pronoun)

परिभाषा: संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त।
भेद

  • पुरुषवाचक: मैं, हम, तुम, आप, वह, वे

  • संकेतवाचक: यह, वह, वही, यही

  • प्रश्नवाचक: कौन, क्या, कैसा, कितना

  • अनिश्चितवाचक: कोई, कुछ, कितना-सा

  • निजवाचक/आत्मवाचक: स्वयं, अपना, अपने-आप

  • संबंधवाचक: जो-सो/वह (उदा. जो परिश्रम करता है, वही सफल होता है)
    टिप: यह/वह कभी-कभी विशेषण भी बनते हैं (जब आगे संज्ञा हो—यह लड़का)।


3) विशेषण (Adjective)

परिभाषा: संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताता है।
मुख्य प्रकार

  • गुणवाचक: अच्छा, सुंदर, तीखा

  • संख्यावाचक: तीन, तीसरा, कुछ, अनेक (निश्चित/अनिश्चित/क्रमवाचक)

  • परिमाणवाचक: थोड़ा, अधिक, पर्याप्त

  • संबंधवाचक: राजकीय, पर्वतीय, देशीय (प्रत्यय-जनित—-ईय, -क/का/की/के आदि)
    ध्यान: हिन्दी में विशेषण प्रायः लिंग-वचन के अनुसार रूप बदलते हैं (सुंदर-सुंदरी, बड़े-बड़ी)—पर अपवाद भी हैं (अपरिवर्तनीय: खुश)।


4) क्रिया (Verb)

परिभाषा: कार्य/घटना/स्थिति का बोध कराती है।
मुख्य भेद

  • सकर्मक (कर्म लेती है): राम किताब पढ़ता है।

  • अकर्मक (कर्म नहीं): बालक सो रहा है।

  • सहायक/सम्बद्ध क्रिया: हूँ, है, था, रहा, गया, सकता, चाहिए (काल/वाच्य/भाव बनाते हैं)

  • क्रिया-रूप: धातु → क्रिया (खेलना), कृदन्त (खेलता/खेला/खेलेगा), कृदन्त-विशेषण (खा-हुआ, किया-हुआ)
    काल/वाच्य/पुरुष-वचन पर प्रश्न पक्के आते हैं—उदाहरण बदल कर रूप पूछते हैं।


5) अव्यय (Indeclinables – रूप न बदलने वाले)

परिभाषा: जो लिंग/वचन/कारक के अनुसार रूप नहीं बदलते—स्थिर रहते हैं।
इस अध्याय में 3 उपसमूह (जैसा आपने पूछा):

5.1 क्रिया-विशेषण (Adverbs)

कार्य/क्रिया की रीति, समय, स्थान आदि बताता है।

  • रीति: धीरे, तेज़, अच्छे-से

  • काल: आज, कल, अभी, तब

  • स्थान: यहाँ, वहाँ, पास, ऊपर

  • परिमाण/प्रमाण: बहुत, थोड़ा, काफ़ी

  • निषेध/स्वीकृति: नहीं, मत, हाँ, जी

5.2 सम्बन्ध-सूचक अव्यय (Postpositions/Prepositions in Hindi)

हिन्दी में “पूर्वसर्ग” की जगह परसर्ग/उत्तरपद चलते हैं—संज्ञा/सर्वनाम के बाद आते हैं:

  • के/की/का (संबंध), को (सम्प्रदान/कर्म), से (अपादान/करण), पर/में/तक/से पहले/के बाद/के लिए/के साथ/के भीतर इत्यादि।
    उदा. लड़के को किताब से पर रखो, उसके लिए मैं आया

परीक्षा में “सम्बन्ध-सूचक अव्यय” का अर्थ ही हिन्दी postpositions है—यह लिख दें।

5.3 विस्मयबोधक निपात (Interjections/Particles)

अचानक भाव/आश्चर्य/दर्द/प्रशंसा/निंदा प्रकट करते हैं:

  • अरे!, हाय!, वाह!, अरेरे!, शाबाश!, धत्!, छीः!
    कुछ निपात भाव-सूचक कण भी हैं: ही, तो, न, ही तो, भी, मात्र, ही-भी—वाक्य-बल/भाव को सूक्ष्मता से बदलते हैं।


🟪 परीक्षा-उन्मुख “फटाफट” पहचान-ट्रिक्स

  • विदेशी: नुक्ता (क़/ख़/ग़/ज़) दिखे—लगभग विदेशी।

  • तत्सम: क्ष/ज्ञ/त्र/श्र जस-का-तस; शुद्ध-धार्मिक/वैज्ञानिक शब्द।

  • अर्ध-तत्सम: मूल संस्कृत झलक + हल्का परिवर्तन (अगिन, कारज, धीरज).

  • तद्भव: बोलचाल वाला बदला रूप (क्षेत्र→खेत, दुग्ध→दूध)।

  • सर्वनाम बनाम विशेषण: यह अकेला हो तो सर्वनाम; यह लड़का—यह = विशेषण।

  • सम्बन्ध-सूचक: के/की/का/को/से/पर/में/तक/लिए/साथ—postpositions, हमेशा बाद आते हैं।


🟧 आम भूलें (और सही समझ)

  • “देशज” ≠ “तद्भव”: देशज का मतलब स्थानीय मूल, जबकि तद्भव संस्कृत-मूल का बदला रूप है।

  • अर्ध-तत्सम को नज़रअन्दाज़ मत करें—RPSC जैसे पेपर्स में अगिन, कारज, धीरज टाइप उदाहरण पूछे जाते हैं।


🟩 10 पक्के उदाहरण – मिलान अभ्यास

(खुद जाँचिए; उत्तर नीचे)

  1. अग्नि | 2. आग | 3. अगिन | 4. खेत | 5. नेत्र |

  2. आँख | 7. क़लम | 8. स्कूल | 9. धीरज | 10. कार्य

कॉलम:

  • तत्सम: ___

  • अर्ध-तत्सम: ___

  • तद्भव: ___

  • विदेशी: ___

उत्तर: तत्सम—1,5,10 | अर्ध-तत्सम—3,9 | तद्भव—2,4,6 | विदेशी—7,8. (संदर्भ: परिभाषाएँ/उदाहरण)

 
MCQ QUIZ START

#1. ‘जो’ कौन-सा सर्वनाम है?

#2. ‘किताब’ किस प्रकार का शब्द है?

#3. ‘थोड़ा’ किस प्रकार का विशेषण है?

#4. ‘मनुष्य’ किस प्रकार की संज्ञा है?

#5. ‘मुँह’ किस प्रकार का शब्द है?

#6. ‘अच्छा लड़का’ में ‘अच्छा’ कौन-सा है?

#7. ‘स्वयं’ कौन-सा सर्वनाम है?

#8. ‘आज’ कौन-सा अव्यय है?

#9. ‘सोना’ किस प्रकार की संज्ञा है?

#10. ‘क्या’ कौन-सा सर्वनाम है?

#11. ‘पढ़ना’ कौन-सा शब्द है?

#12. ‘सत्य’ किस प्रकार की संज्ञा है?

#13. ‘के लिए’ कौन-सा अव्यय है?

#14. ‘कौन’ कौन-सा सर्वनाम है?

#15. ‘यह’ कौन-सा सर्वनाम है?

#16. ‘डमरू’ किस प्रकार का शब्द है?

#17. ‘अग्नि’ किस प्रकार का शब्द है?

#18. ‘किरन’ किस प्रकार का शब्द है?

#19. ‘तीन किताबें’ में ‘तीन’ कौन-सा विशेषण है?

#20. ‘अपना’ कौन-सा सर्वनाम है?

#21. ‘अरे!’ कौन-सा अव्यय है?

#22. ‘कुर्सी’ किस प्रकार का शब्द है?

#23. ‘खाना’ कौन-सा शब्द है?

#24. ‘ज्यादा’ किस प्रकार का विशेषण है?

#25. ‘राम’ किस प्रकार की संज्ञा है?

#26. ‘भारत’ किस प्रकार की संज्ञा है?

#27. ‘ओह!’ कौन-सा अव्यय है?

#28. ‘झोला’ किस प्रकार का शब्द है?

#29. ‘हूँ’ कौन-सी क्रिया है?

#30. ‘दिल्ली’ किस प्रकार की संज्ञा है?

#31. ‘मुख’ किस प्रकार का शब्द है?

#32. ‘लाल फूल’ में ‘लाल’ कौन-सा शब्द है?

#33. ‘से’ कौन-सा अव्यय है?

#34. ‘सुंदरता’ किस प्रकार की संज्ञा है?

#35. ‘आग’ किस प्रकार का शब्द है?

#36. ‘सूरज उगता है’ किस प्रकार की क्रिया है?

#37. ‘वाह!’ कौन-सा अव्यय है?

#38. ‘सो’ कौन-सा सर्वनाम है?

#39. ‘किरण’ किस प्रकार का शब्द है?

#40. ‘पेन’ किस भाषा से आया विदेशी शब्द है?

#41. ‘सुंदर’ किस प्रकार का विशेषण है?

#42. ‘तक’ कौन-सा अव्यय है?

#43. ‘वह’ कौन-सा सर्वनाम है?

#44. ‘अलमारी’ किस भाषा से आया विदेशी शब्द है?

#45. ‘पानी’ किस प्रकार की संज्ञा है?

#46. ‘लिखना’ कौन-सा शब्द है?

#47. ‘हम’ कौन-सा सर्वनाम है?

#48. ‘धीरे’ कौन-सा अव्यय है?

#49. ‘मैं’ कौन-सा सर्वनाम है?

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