📘 राजस्थान – मेले, त्योहार, लोकसंगीत व लोकनृत्य (Detailed Notes)
1) मेले (Fairs of Rajasthan)
राजस्थान को “मेले-त्योहारों की धरती” कहा जाता है। यहाँ के मेले मुख्यतः चार श्रेणियों में बाँटे जा सकते हैं –
(A) धार्मिक मेले
रामदेवरा मेला (जैसलमेर – रामदेवरा)
लोकदेवता बाबा रामदेवजी की स्मृति में।
भाद्रपद शुक्ल एकादशी–द्वादशी को लगता है।
हिन्दू व मुस्लिम दोनों समुदाय भाग लेते हैं।
देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
करणी माता मेला (देशनोक, बीकानेर)
नवरात्रि (चैत्र व आश्विन) में साल में दो बार।
प्रसिद्ध “चूहों का मंदिर”।
गोगामेड़ी मेला (हनुमानगढ़)
भाद्रपद कृष्ण नवमी पर।
लोकदेवता गोगाजी (जाहरपीर) की पूजा।
साँपों के देवता; मुस्लिम-हिन्दू दोनों पूजते हैं।
तेजाजी मेला (नागौर-खड़नाल, अजमेर-परबतसर)
भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी)।
नागदेवता तेजाजी की पूजा।
देव नारायण मेला (टोंक-असिंध, भीलवाड़ा)
माघ-फाल्गुन में।
देव नारायणजी (लोकदेवता, विष्णु अवतार) की आराधना।
फड़ गायन परंपरा जुड़ी।
अजमेर शरीफ़ का ऊर्स
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (ग़रीब नवाज़) की स्मृति में।
इस्लामी माह रजब में आयोजित।
(B) पशु व व्यापारिक मेले
पुष्कर पशु मेला (अजमेर)
कार्तिक पूर्णिमा को लगता है।
एशिया का सबसे बड़ा ऊँट-घोड़ा मेला।
विदेशी पर्यटकों की भागीदारी; सांस्कृतिक कार्यक्रम।
नागौर पशु मेला (नागौर)
माघ माह में।
बैल, ऊँट, घोड़ों का व्यापार।
राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला।
कोलायत मेला (बीकानेर)
कार्तिक पूर्णिमा।
पवित्र झील पर दीपदान।
(C) आदिवासी मेले
बनेश्वर मेला (डूंगरपुर-बांसवाड़ा, सोम-माही-जाखम संगम)
माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक।
भील समुदाय का सबसे बड़ा मेला।
“मावजी महाराज” (भील देवता) की पूजा।
काशी (कास) मेला (बांसवाड़ा)
स्थानीय आदिवासी/भील मेले।
(D) सांस्कृतिक/महोत्सव
मरु महोत्सव (जैसलमेर) – फरवरी; ऊँट नृत्य, मटकी दौड़, मिस्टर डेजर्ट।
ऊँट महोत्सव (बीकानेर) – जनवरी; ऊँटों की शृंगार/रेस/डांस प्रतियोगिता।
मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर) – गणगौर पर्व से जुड़ा।
पतंग महोत्सव (जयपुर) – मकर संक्रांति पर।
RIFF – Rajasthan International Folk Festival (जोधपुर, मेहरानगढ़) – शरद पूर्णिमा पर।
सूफ़ी महोत्सव (नागौर-जोधपुर) – अहिछत्रगढ़ किले में सूफ़ी संगीत।
2) त्योहार (Festivals of Rajasthan)
(A) प्रमुख धार्मिक त्योहार
गणगौर → शिव-पार्वती पूजा, महिलाओं का प्रमुख पर्व।
तीज → सावन-भादो का पर्व; जयपुर का तीज उत्सव सबसे प्रसिद्ध।
होली → शेखावाटी क्षेत्र की “डोलची होली”, झालावाड़/कोटा की “गेर” होली, मारवाड़ की “चंग धमाल”।
शीतला सप्तमी/अष्टमी → शीतला माता की पूजा, बासी भोजन की परंपरा।
दीपावली, दशहरा, जन्माष्टमी, रामनवमी → पूरे राजस्थान में व्यापक रूप से।
(B) क्षेत्रीय महत्त्व
गवरी (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) – आदिवासी धार्मिक-नाट्य पर्व।
मरु/ऊँट महोत्सव – पर्यटन से जुड़े सांस्कृतिक आयोजन।
3) लोकसंगीत (Folk Music of Rajasthan)
(A) प्रमुख शैलियाँ
मांड गायन – राजस्थान की अर्द्धशास्त्रीय शैली; प्रेम-श्रृंगार-वीरह भाव।
प्रसिद्ध गायिका: अल्लाह जिलाई बाई।
पल्लू गीत – विवाह गीत।
बन्ना-बन्नी गीत – शादी-ब्याह के समय।
पाणिहारिणी गीत – जल लाने वाली स्त्रियों के गीत।
झूलना गीत – सावन में झूलों पर।
फड़ गायन – पाबूजी/देव नारायण की कथा; भोपा-भोपी द्वारा रावणहट्टा पर।
(B) लोक संगीत समुदाय
लंगा और मांगणियार – पश्चिमी राजस्थान के पारंपरिक गायक।
भोपा-भोपी – फड़ गायन करते हैं।
मेव – अलवर-भरतपुर क्षेत्र, “भapang” वाद्य से।
(C) प्रमुख वाद्ययंत्र
रावणहट्टा – फड़ गायन।
कमायचा – मांगणियार।
सारंगी – लंगा-मांगणियार।
अल्गोज़ा – दोहरी बांसुरी।
मोरचंग – ताल वाद्य।
खड़ताल – ताल साधन।
भapang (अलवर) – एक-तंत्री ड्रम।
चंग – होली में।
4) लोकनृत्य (Folk Dances of Rajasthan)
(A) महिला प्रधान नृत्य
| नृत्य | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| घूमर | उदयपुर-मेवाड़ | महिलाएँ गोल घेरे में नृत्य करती हैं। |
| तेरह-ताली | अजमेर (कांवरीया समाज) | 13 मंजीरों को शरीर से बाँधकर। |
| कलबेलिया | अजमेर-जोधपुर | साँपों की भाँति नृत्य, UNESCO धरोहर। |
| भवई | उदयपुर-चित्तौड़ | सिर पर मटकों की परतें रखकर। |
| चरी नृत्य | किशनगढ़-अजमेर | सिर पर जलते दीपक वाली चरी रखकर। |
(B) पुरुष/सामूहिक नृत्य
| नृत्य | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| गैर/डांडी-गैर | मेवाड़-मारवाड़ | डंडों/साफों के साथ; होली पर। |
| कुच्छी घोड़ी | शेखावाटी | नकली घोड़े के साथ। |
(C) आदिवासी नृत्य
| नृत्य | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| गवरी | डूंगरपुर-बांसवाड़ा | धार्मिक नाट्य नृत्य (भील)। |
| गरासिया | सिरोही | आदिवासी नृत्य। |
| वालर | मेवाड़ | युद्धक नृत्य। |
| पंथेर/गवराई | भील क्षेत्र | अनुष्ठानिक नृत्य। |
5) परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण One-Liners
एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला – पुष्कर (अजमेर)।
राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला – नागौर।
सबसे बड़ा आदिवासी मेला – बनेश्वर (डूंगरपुर-बांसवाड़ा)।
UNESCO धरोहर नृत्य – कलबेलिया (2010)।
घूमर – मेवाड़ की पहचान।
गवरी – भील आदिवासी नाट्य नृत्य।
प्रसिद्ध गायिका – अल्लाह जिलाई बाई (मांड गायन)।
लंगा-मांगणियार – पश्चिमी राजस्थान के लोकसंगीतकार।
6) Comparison Table
| श्रेणी | उदाहरण |
|---|---|
| धार्मिक मेले | रामदेवरा, करणी माता, गोगामेड़ी, तेजाजी, देव नारायण |
| पशु मेले | पुष्कर, नागौर, कोलायत |
| आदिवासी मेले | बनेश्वर, काशी |
| सांस्कृतिक महोत्सव | मरु (जैसलमेर), ऊँट (बीकानेर), मेवाड़ (उदयपुर), काइट (जयपुर), RIFF (जोधपुर) |
| लोकसंगीत | मांड, पल्लू, बन्ना-बन्नी, पाणिहारिणी, फड़ गायन |
| वाद्ययंत्र | रावणहट्टा, कमायचा, सारंगी, मोरचंग, खड़ताल, चंग |
| लोकनृत्य | घूमर, गैर, भवई, कलबेलिया, तेरह-ताली, चरी |
| आदिवासी नृत्य | गवरी, गरासिया, वालर, पंथेर |
7) Quick Revision (15 सेकंड)
मेले → रामदेवरा, करणी माता, गोगामेड़ी, पुष्कर, नागौर, बनेश्वर।
त्योहार → गणगौर, तीज, शीतला सप्तमी, होली (गेर/चंग/डोलची)।
लोकसंगीत → मांड, फड़ गायन (भोपा-भोपी), लंगा-मांगणियार।
वाद्ययंत्र → रावणहट्टा, कमायचा, सारंगी, मोरचंग, चंग।
लोकनृत्य → घूमर, कलबेलिया (UNESCO), भवई, गवरी (आदिवासी)।
📘 Practice MCQs


