पंचवर्षीय योजनाएँ, कृषि-उद्योग-सेवा क्षेत्र, सुधार, उदारीकरण
1. पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans of India)
🔹 पृष्ठभूमि
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स्वतंत्र भारत ने योजना आधारित विकास का मार्ग अपनाया।
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योजना आयोग (Planning Commission) – 1950 में स्थापित (अध्यक्ष: प्रधानमंत्री)।
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प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) → कृषि, सिंचाई, बांध।
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बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) → अंतिम योजना।
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2015 से योजना आयोग की जगह NITI Aayog (नीति आयोग) ने ली।
🔹 प्रमुख योजनाएँ और उनके लक्ष्य
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प्रथम योजना (1951-56) – कृषि व सिंचाई।
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द्वितीय योजना (1956-61) – औद्योगिकीकरण (महालनोबिस मॉडल)।
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तृतीय योजना (1961-66) – स्वावलंबी अर्थव्यवस्था, असफल (1962 व 1965 युद्ध, अकाल)।
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चौथी योजना (1969-74) – “गरीबी हटाओ”।
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पाँचवीं योजना (1974-79) – गरीबी उन्मूलन, रोजगार।
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छठी योजना (1980-85) – तकनीकी विकास, गरीबी घटाना।
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आठवीं योजना (1992-97) – LPG सुधार के बाद आर्थिक उदारीकरण।
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ग्यारहवीं योजना (2007-12) – समावेशी वृद्धि।
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बारहवीं योजना (2012-17) – “तेजी से, समावेशी और सतत विकास”।
2. कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector)
🔹 योगदान
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रोजगार में सर्वाधिक (~40%+)।
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GDP में हिस्सा धीरे-धीरे घट रहा (~16-18%)।
🔹 विशेष पहल
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हरित क्रांति (1960s) – HYV बीज, सिंचाई, उर्वरक।
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श्वेत क्रांति – दुग्ध उत्पादन (ऑपरेशन फ्लड, वर्गीज कुरियन)।
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नीली क्रांति – मत्स्य पालन।
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पीली क्रांति – तिलहन उत्पादन।
🔹 समस्याएँ
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वर्षा पर निर्भरता।
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छोटे जोत।
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तकनीकी पिछड़ापन।
3. उद्योग क्षेत्र (Industrial Sector)
🔹 ऐतिहासिक विकास
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1956 की औद्योगिक नीति संकल्प → सार्वजनिक क्षेत्र पर जोर।
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1991 तक “लाइसेंस-परमिट-कोटा राज”।
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1991 के बाद निजीकरण व वैश्वीकरण से तेजी।
🔹 वर्तमान पहल
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Make in India।
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Start-up India।
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MSMEs को बढ़ावा।
🔹 योगदान
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GDP में ~27%।
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रोजगार में ~20%।
4. सेवा क्षेत्र (Service Sector)
🔹 योगदान
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GDP में सर्वाधिक (~55%+)।
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रोजगार में ~30%।
🔹 प्रमुख क्षेत्र
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बैंकिंग, बीमा, IT, BPO, पर्यटन, परिवहन।
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IT सेवाएँ → भारत की वैश्विक पहचान (Infosys, TCS, Wipro)।
5. आर्थिक सुधार (Economic Reforms)
🔹 1991 से पहले
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नियंत्रित अर्थव्यवस्था।
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विदेशी निवेश पर रोक।
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भारी भरकम लाइसेंसिंग।
🔹 1991 के बाद सुधार (New Economic Policy, 1991)
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कारण: भुगतान संकट, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी, IMF-World Bank का दबाव।
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सुधार की दिशा: LPG नीति।
6. उदारीकरण (Liberalisation)
🔹 परिभाषा
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आर्थिक गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण कम करना।
🔹 उपाय
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औद्योगिक लाइसेंसिंग हटाई।
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विदेशी निवेश प्रोत्साहन।
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व्यापार व आयात-निर्यात उदारीकरण।
7. निजीकरण (Privatisation)
🔹 परिभाषा
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सरकारी उपक्रमों को निजी क्षेत्र को सौंपना या निजी पूंजी निवेश बढ़ाना।
🔹 रूप
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Disinvestment (हिस्सेदारी बेचना)।
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PPP Model (Public Private Partnership)।
8. वैश्वीकरण (Globalisation)
🔹 परिभाषा
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विश्व अर्थव्यवस्था से भारतीय अर्थव्यवस्था का जुड़ाव।
🔹 उपाय
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WTO सदस्यता (1995)।
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विदेशी पूंजी (FDI/FII) प्रोत्साहन।
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बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आगमन।
9. प्रभाव
🔹 सकारात्मक
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विदेशी निवेश में वृद्धि।
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IT व सेवा क्षेत्र में तेजी।
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गुणवत्ता व प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
🔹 नकारात्मक
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आय असमानता में वृद्धि।
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कृषि क्षेत्र उपेक्षित।
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विदेशी उत्पादों पर निर्भरता।
📊 तुलनात्मक सारणी
| क्षेत्र/नीति | मुख्य उद्देश्य | योगदान | प्रमुख बिंदु |
|---|---|---|---|
| पंचवर्षीय योजनाएँ | दीर्घकालीन विकास | 1951-2017 | कृषि, उद्योग, गरीबी उन्मूलन |
| कृषि | रोजगार | ~40% | हरित/श्वेत/नीली क्रांति |
| उद्योग | उत्पादन | ~27% | Make in India, MSME |
| सेवा | GDP में सबसे बड़ा योगदान | ~55% | IT, पर्यटन, वित्त |
| उदारीकरण | नियंत्रण कम | – | विदेशी निवेश, व्यापार स्वतंत्रता |
| निजीकरण | PSU में निजी भागीदारी | – | Disinvestment, PPP |
| वैश्वीकरण | विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ाव | – | WTO, FDI, FII |
🔑 Quick Revision
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पहली योजना = कृषि, दूसरी = उद्योग, ग्यारहवीं = समावेशी वृद्धि, बारहवीं = सतत व तेज वृद्धि।
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कृषि → रोजगार, उद्योग → उत्पादन, सेवा → GDP योगदान।
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1991 = LPG सुधार (Liberalisation, Privatisation, Globalisation)।
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NITI Aayog (2015) ने योजना आयोग की जगह ली।


