📘 भारत सरकार अधिनियम 1919 व 1935 – विस्तृत नोट्स
🔹 1. पृष्ठभूमि
(A) 1919 अधिनियम
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प्रथम विश्व युद्ध (1914–18) के बाद भारत में संवैधानिक सुधार की माँग।
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मॉन्टेग्यू घोषणा (1917) – ब्रिटिश सरकार ने कहा कि भारत में क्रमिक रूप से जिम्मेदार सरकार दी जाएगी।
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इसी आधार पर आया – भारत सरकार अधिनियम 1919।
(B) 1935 अधिनियम
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1927: साइमन कमीशन (All British, “Simon Go Back”)।
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1930–32: तीन गोलमेज सम्मेलन।
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1933: श्वेत पत्र (White Paper) प्रकाशित।
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1935: सबसे लंबा व व्यापक अधिनियम → भारतीय संविधान का आधार।
🔹 2. भारत सरकार अधिनियम 1919 (Montagu-Chelmsford Reforms)
(A) केंद्रीय स्तर
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द्विसदनीय विधानमंडल (Bicameral Legislature) – पहली बार:
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Council of State (उच्च सदन) → सदस्य संख्या 60।
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Legislative Assembly (निम्न सदन) → सदस्य संख्या 145।
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गवर्नर जनरल के पास वीटो व आपातकालीन अधिकार।
(B) प्रांतीय स्तर
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द्वैध शासन (Dyarchy) की शुरुआत (Governor + दो प्रकार के मंत्री):
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Reserved Subjects (गवर्नर के पास): रक्षा, पुलिस, वित्त, न्याय, भूमि राजस्व।
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Transferred Subjects (भारतीय मंत्रियों को): शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय स्वशासन, कृषि।
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गवर्नर को मंत्रियों पर वीटो व नियंत्रण।
(C) अन्य प्रावधान
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भारत सचिव और गवर्नर जनरल के अधिकार बरकरार।
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फ्रेंचाइज (मताधिकार): संपत्ति, आय, शिक्षा पर आधारित → केवल ~10% जनसंख्या को।
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Public Service Commission (UPSC): प्रथम बार स्थापित।
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हाई कोर्ट्स: अधिकार बढ़ाए गए।
(D) सीमाएँ
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जिम्मेदार शासन नहीं मिला।
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केंद्रीय स्तर पर भारतीयों की भागीदारी सीमित।
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केवल प्रांतीय स्तर पर मामूली उत्तरदायित्व।
🔹 3. भारत सरकार अधिनियम 1935
(A) संघीय संरचना (Federation of India)
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प्रांत + देशी रियासतों का संघ।
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प्रांत शामिल हुए, लेकिन रियासतें नहीं → संघीय ढाँचा लागू नहीं हो पाया।
(B) प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy)
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1919 का द्वैध शासन समाप्त।
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प्रांतों को पूर्ण स्वायत्तता दी गई।
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मंत्रिपरिषद विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी।
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गवर्नर के पास अब भी विशेष अधिकार (Veto, Reserve Powers)।
(C) केंद्रीय स्तर
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द्विसदनीय विधानमंडल।
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गवर्नर जनरल को विशेष अधिकार: रक्षा, विदेश नीति, वित्त पर नियंत्रण।
(D) विषयों का विभाजन (Three Lists)
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संघ सूची (59 विषय) – रक्षा, विदेश, रेलवे।
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प्रांतीय सूची (54 विषय) – पुलिस, स्थानीय शासन, कृषि।
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समवर्ती सूची (36 विषय) – आपराधिक कानून, विवाह, दिवालियापन।
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यह प्रथम बार समवर्ती सूची का प्रावधान।
(E) निर्वाचन व्यवस्था
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मताधिकार बढ़ाकर ~14% जनसंख्या तक।
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अभी भी सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार नहीं।
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पृथक निर्वाचिका (Separate Electorates) SC, ST, मुस्लिम, महिला, श्रमिक के लिए।
(F) संघीय न्यायालय (Federal Court)
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1937 में स्थापित (दिल्ली)।
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अपीलीय व परामर्शी अधिकार।
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1950 में यह सुप्रीम कोर्ट बना।
(G) आर्थिक प्रावधान
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) – 1935 अधिनियम से स्थापित, 1937 से कार्यरत।
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संघीय वित्त आयोग।
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रेल्वे प्राधिकरण।
(H) अन्य प्रावधान
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प्रांतों में द्विसदनीय विधानमंडल (बॉम्बे व मद्रास)।
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संघीय लोक सेवा आयोग, प्रांतीय लोक सेवा आयोग।
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गवर्नर व गवर्नर जनरल के पास विशेष शक्तियाँ।
🔹 4. 1919 बनाम 1935 अधिनियम तुलना
| बिंदु | 1919 अधिनियम | 1935 अधिनियम |
|---|---|---|
| शासन प्रणाली | प्रांतों में द्वैध शासन | प्रांतीय स्वायत्तता |
| संघीय ढाँचा | प्रस्तावित नहीं | प्रस्तावित (प्रांत + रियासतें) |
| विषय विभाजन | Reserved/Transferred | संघ, प्रांतीय, समवर्ती सूची |
| विधानमंडल | केंद्रीय द्विसदनीय | प्रांतीय + केंद्रीय द्विसदनीय |
| न्यायालय | PSC व हाई कोर्ट | संघीय न्यायालय, RBI |
| मताधिकार | ~10% जनसंख्या | ~14% जनसंख्या |
| पृथक निर्वाचिका | मुस्लिम | मुस्लिम + SC/ST + महिलाएँ + श्रमिक |
| संस्थाएँ | Public Service Commission | RBI (1937), Federal Court (1937) |
🔹 5. भारतीय संविधान पर प्रभाव
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1919 अधिनियम → द्विसदनीयता, जिम्मेदार शासन की शुरुआत।
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1935 अधिनियम → संघीय ढाँचा, समवर्ती सूची, न्यायालय, RBI → भारतीय संविधान का आधार।
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संविधान सभा ने कई प्रावधान सीधे 1935 अधिनियम से लिए।


