📘 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
✦ स्पेस टेक्नोलॉजी, रक्षा तकनीक और नैनो टेक्नोलॉजी
1️⃣ स्पेस टेक्नोलॉजी (Space Technology)
🔹 परिचय
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स्पेस टेक्नोलॉजी (अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी) वह विज्ञान है जिसमें उपग्रह (Satellites), रॉकेट, अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष अनुसंधान और अंतरिक्ष संचार शामिल हैं।
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भारत की प्रमुख संस्था: ISRO (Indian Space Research Organisation) जिसकी स्थापना 1969 में की गई थी।
🔹 भारत की लॉन्चिंग प्रणाली
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SLV (Satellite Launch Vehicle) – पहला भारतीय रॉकेट, 1980 में रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
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ASLV (Augmented Satellite Launch Vehicle) – 1987, सीमित सफलता।
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PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) –
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1993 से प्रयोग में।
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ध्रुवीय कक्षा (Polar Orbit) में उपग्रह स्थापित करता है।
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भारत का “Workhorse Launcher”।
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2017 में एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड।
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GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) –
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संचार उपग्रहों को भूस्थैतिक कक्षा (Geosynchronous Orbit) में स्थापित करता है।
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GSLV Mk-III (अब LVM-3) चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 का लॉन्चर रहा।
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🔹 उपग्रह वर्गीकरण
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INSAT श्रृंखला – मौसम पूर्वानुमान, टीवी, रेडियो संचार।
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IRS श्रृंखला – प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण, कृषि, जल संसाधन।
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GSAT श्रृंखला – आधुनिक संचार व ब्रॉडकास्टिंग।
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NAVIC (Navigation with Indian Constellation) – भारत की स्वदेशी GPS प्रणाली।
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असमान्य उपग्रह – Astrosat (Space Observatory)।
🔹 प्रमुख मिशन
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चंद्रयान-1 (2008) – चाँद पर पानी की खोज।
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चंद्रयान-2 (2019) – लैंडर विक्रम असफल, पर ऑर्बिटर कार्यरत।
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चंद्रयान-3 (2023) – दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग, भारत पहला देश।
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मंगलयान (2013) – एशिया का पहला सफल मंगल मिशन।
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गगनयान (चल रहा है) – भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन।
🔹 राजस्थान संदर्भ
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पोखरण – परमाणु परीक्षण स्थल (1974 व 1998)।
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जैसलमेर/बीकानेर – रक्षा उपग्रह निगरानी।
2️⃣ रक्षा तकनीक (Defense Technology)
🔹 परिचय
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रक्षा तकनीक का अर्थ है मिसाइल, टैंक, रडार, विमान, पनडुब्बी, लड़ाकू प्रणाली का विकास।
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प्रमुख संस्था: DRDO (Defence Research and Development Organisation) – 1958 में स्थापना।
🔹 मिसाइल प्रणाली
भारत का Integrated Guided Missile Development Program (IGMDP) → 1983, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में।
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पृथ्वी – सतह से सतह।
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आकाश – सतह से आकाश।
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त्रिशूल – कम दूरी की सतह से आकाश।
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नाग – एंटी-टैंक।
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अग्नि श्रृंखला – लंबी दूरी की।
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ब्रह्मोस – भारत-रूस संयुक्त परियोजना, सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल।
🔹 अन्य तकनीकें
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रडार (Radar) – Radio Detection and Ranging।
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सोनार (Sonar) – पनडुब्बी में उपयोग।
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ड्रोन – निगरानी, हथियार ले जाने में।
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नाइट विज़न डिवाइस – कम रोशनी में दृश्यता।
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इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम।
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INS Arihant – भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी।
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तेजस (LCA) – स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान।
🔹 राजस्थान संदर्भ
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पोखरण – परमाणु परीक्षण।
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जैसलमेर/बीकानेर – सेना की महत्वपूर्ण छावनियाँ।
3️⃣ नैनो टेक्नोलॉजी (Nanotechnology)
🔹 परिचय
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“Nano” = 1 नैनोमीटर = 10⁻⁹ मीटर।
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नैनो टेक्नोलॉजी वह तकनीक है जिसमें पदार्थ को 1–100 nm आकार तक छोटा करके उसका उपयोग नई-नई तकनीकों में किया जाता है।
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यह आधुनिक विज्ञान की सबसे तेजी से बढ़ती शाखाओं में से एक है।
🔹 नैनो सामग्री (Nano Materials)
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Carbon Nanotubes – अत्यधिक मजबूत और हल्के।
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Graphene – विद्युत का अच्छा संवाहक।
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Nano Particles – दवा और ऊर्जा में उपयोग।
🔹 अनुप्रयोग
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स्वास्थ्य –
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कैंसर उपचार (Drug Targeting)।
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नैनो रोबोट्स (भविष्य में ब्लड क्लॉट हटाने हेतु)।
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ऊर्जा –
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सौर सेल की दक्षता बढ़ाना।
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बैटरी की क्षमता बढ़ाना।
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इलेक्ट्रॉनिक्स –
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नैनो चिप्स, छोटे व तेज कंप्यूटर।
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मोबाइल व लैपटॉप में उच्च दक्षता।
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सामग्री विज्ञान –
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हल्के और मजबूत मटेरियल (विमान, अंतरिक्ष यान)।
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कृषि –
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नैनो फर्टिलाइज़र।
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फसल सुरक्षा।
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🔹 भारत में पहल
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Nano Mission (2007) – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा।
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IITs, IISc, NPL में अनुसंधान।
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भारत में “Nano Science and Technology Mission (NSTM)” चल रहा है।
📌 त्वरित पुनरावलोकन (Quick Revision)
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स्पेस टेक्नोलॉजी → PSLV, GSLV, NAVIC, चंद्रयान, मंगलयान, गगनयान।
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रक्षा तकनीक → DRDO, पृथ्वी, आकाश, नाग, अग्नि, ब्रह्मोस, तेजस, INS Arihant।
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नैनो टेक्नोलॉजी → 1–100 nm, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, कृषि।
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राजस्थान → पोखरण परमाणु परीक्षण, जैसलमेर रक्षा निगरानी।


