📘 पंचायती राज एवं स्थानीय स्वशासन
🔹 1. पृष्ठभूमि
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भारत में ग्राम स्वराज का विचार प्राचीन काल से है।
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महात्मा गांधी ने पंचायतों को लोकतंत्र की आत्मा कहा।
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संविधान सभा में शुरुआत में पंचायतों को केवल राज्य नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 40) में रखा गया था –
“राज्य ग्राम पंचायतों का संगठन करेगा और उन्हें स्वशासन की आवश्यक शक्तियाँ देगा।” -
1950 के दशक में पंचायती राज पर ज़ोर दिया गया।
(A) समितियाँ
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बलवंत राय मेहता समिति (1957)
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त्रिस्तरीय प्रणाली (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद)।
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प्रत्यक्ष चुनाव ग्राम पंचायत के लिए।
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विकास योजनाओं के लिए पंचायतें जिम्मेदार।
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अशोक मेहता समिति (1977)
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द्विस्तरीय प्रणाली (जिला और मंडल स्तर)।
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राजनीतिक दलों की भागीदारी का सुझाव।
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जीवीके राव समिति (1985)
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पंचायतों को विकास प्रशासन का केंद्र।
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एलएम सिंहवी समिति (1986)
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पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश।
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🔹 2. 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (पंचायती राज)
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लागू: 24 अप्रैल 1993।
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नया भाग: भाग IX (अनुच्छेद 243–243O)।
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नई अनुसूची: 11वीं अनुसूची – 29 विषय।
(A) संरचना
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त्रिस्तरीय ढाँचा:
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ग्राम पंचायत (गाँव स्तर)
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पंचायत समिति (ब्लॉक/तहसील स्तर)
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जिला परिषद (जिला स्तर)
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(B) चुनाव व आरक्षण
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प्रत्यक्ष चुनाव ग्राम पंचायत व पंचायत समिति के लिए।
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कार्यकाल: 5 वर्ष।
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आरक्षण: SC, ST, OBC और महिलाओं के लिए (कम से कम 33% → कई राज्यों में 50%)।
(C) वित्तीय प्रावधान
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राज्य वित्त आयोग (SFC): हर 5 वर्ष में गठन।
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पंचायतों को संसाधन व अनुदान।
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केंद्रीय वित्त आयोग: पंचायतों को अनुदान की सिफारिश करता है।
(D) राज्य चुनाव आयोग
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पंचायत चुनावों की देखरेख (अनु. 243K)।
🔹 3. 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (शहरी स्थानीय निकाय)
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लागू: 1 जून 1993।
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नया भाग: भाग IX-A (अनुच्छेद 243P–243ZG)।
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नई अनुसूची: 12वीं अनुसूची – 18 विषय।
(A) संस्थाएँ
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नगर पंचायत (Nagar Panchayat): ग्रामीण से शहरी में परिवर्तनशील कस्बे।
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नगर परिषद (Municipality): मध्यम आकार के शहर।
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नगर निगम (Municipal Corporation): बड़े शहर।
(B) विशेष प्रावधान
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कार्यकाल: 5 वर्ष।
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महिलाओं, SC, ST, OBC के लिए सीटों का आरक्षण।
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महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee)।
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राज्य वित्त आयोग और राज्य चुनाव आयोग की भूमिका।
🔹 4. वित्तीय व प्रशासनिक व्यवस्था
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पंचायत व नगरपालिका को स्वतंत्र वित्तीय स्रोत नहीं।
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कर, शुल्क व अनुदान राज्यों से मिलते हैं।
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वित्त आयोग की सिफारिशों पर अनुदान।
🔹 5. महत्व
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लोकतंत्र का विकेंद्रीकरण।
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स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित योजनाएँ।
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महिला सशक्तिकरण (आरक्षण के कारण)।
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सामाजिक न्याय और समावेश।
🔹 6. चुनौतियाँ
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वित्तीय संसाधनों की कमी।
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प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी।
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राजनीतिक हस्तक्षेप।
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भ्रष्टाचार।
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ग्रामीण/शहरी असमानता।
🔹 7. त्वरित पुनरावृत्ति तालिका
| पहलू | पंचायत राज (73वाँ) | शहरी निकाय (74वाँ) |
|---|---|---|
| लागू वर्ष | 1993 | 1993 |
| अनुच्छेद | 243–243O | 243P–243ZG |
| अनुसूची | 11वीं (29 विषय) | 12वीं (18 विषय) |
| ढाँचा | त्रिस्तरीय | नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम |
| चुनाव | राज्य चुनाव आयोग | राज्य चुनाव आयोग |
| वित्त | राज्य वित्त आयोग | राज्य वित्त आयोग |
| आरक्षण | SC, ST, OBC, महिला | SC, ST, OBC, महिला |


