📘 व्याकरणिक कोटियाँ
1️⃣ परसर्ग (Postpositions)
👉 परिभाषा – हिन्दी में संज्ञा/सर्वनाम के बाद आने वाले छोटे-छोटे शब्द जो उनका संबंध, कारक या स्थिति स्पष्ट करते हैं, उन्हें परसर्ग कहते हैं।
(अंग्रेज़ी में Preposition = पहले, हिन्दी में Postposition = बाद में)।
🔹 प्रकार
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संबंधसूचक परसर्ग – का, की, के
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राम का घर, सीता की पुस्तक, भाई के मित्र
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कर्म/सम्प्रदान सूचक परसर्ग – को
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राम को बुलाओ, मुझे दवा दो
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करण/अपादान सूचक परसर्ग – से
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कलम से लिखना (करण)
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दिल्ली से आना (अपादान)
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अधिकरण सूचक परसर्ग – पर, में, परे, भीतर
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मेज़ पर किताब, घर में रहना, गाँव के भीतर
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दिशा/सीमा सूचक परसर्ग – तक, तकरीबन
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स्टेशन तक जाना, दिल्ली तक पहुँचना
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उद्देश्य सूचक परसर्ग – लिए, हेतु
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तुम्हारे लिए यह उपहार है।
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साथसूचक परसर्ग – संग, साथ
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राम के साथ सीता गई।
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📌 परीक्षा टिप्स
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“परसर्ग” = कारक चिह्न।
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अक्सर प्रश्न आता है: “राम ने कलम ___ लिखा” → उत्तर: से।
2️⃣ लिंग (Gender)
👉 परिभाषा – संज्ञा/सर्वनाम के साथ जुड़ा जातिगत/लैंगिक भेद लिंग कहलाता है।
🔹 हिन्दी में मुख्यतः दो लिंग
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पुल्लिंग – राम, पुरुष, पर्वत, समय, कलम, गुरु।
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स्त्रीलिंग – सीता, स्त्री, नारी, नदी, नगरी, दिशा।
🔹 विशेष वर्ग
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उभयलिंग/नपुंसक लिंग – व्यक्ति, बच्चा, शिशु (दोनों लिंगों पर लागू हो सकता है)।
🔹 लिंग परिवर्तन के नियम
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-आ → -ई
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राजा → रानी, सेवक → सेविका।
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विशेष प्रत्यय जोड़कर
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धनी → धन्या, गायक → गायिका।
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शब्द पूर्णतः बदल जाते हैं
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पिता ↔ माता, भाई ↔ बहन।
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📌 टिप्स – नदी, नगरी, दिशा नाम → प्रायः स्त्रीलिंग। पेड़, पर्वत, समय → पुल्लिंग।
3️⃣ वचन (Number)
👉 परिभाषा – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया में संख्या का बोध कराना।
🔹 प्रकार
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एकवचन – एक वस्तु/व्यक्ति का बोध।
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लड़का, किताब, बच्चा।
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बहुवचन – एक से अधिक का बोध।
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लड़के, किताबें, बच्चे।
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🔹 बहुवचन बनाने के नियम
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पुल्लिंग “आ” अंत → “ए” (लड़का → लड़के)।
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स्त्रीलिंग “ई” अंत → “इयाँ” (लड़की → लड़कियाँ)।
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अपवाद: दूध, पानी, धन → बहुवचन रूप नहीं।
📌 टिप्स – “पुस्तक – पुस्तके” गलत है। सही = पुस्तकें।
4️⃣ पुरुष (Person)
👉 परिभाषा – क्रिया का संबंध कर्ता से किस दृष्टि से है, इसे पुरुष कहते हैं।
🔹 प्रकार
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प्रथम पुरुष (First Person) – बोलने वाला → मैं, हम।
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मध्यम पुरुष (Second Person) – जिससे बात हो रही है → तू, तुम, आप।
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उत्तम पुरुष (Third Person) – जिसके विषय में कहा जा रहा है → वह, वे, यह, राम।
📌 टिप्स –
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“तुम लोग परीक्षा दोगे” → मध्यम पुरुष।
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“राम पढ़ता है” → उत्तम पुरुष।
5️⃣ काल (Tense)
👉 परिभाषा – क्रिया के होने का समय।
🔹 तीन मुख्य काल
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वर्तमान काल – मैं पढ़ता हूँ।
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अपूर्ण वर्तमान → राम पढ़ रहा है।
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सामान्य वर्तमान → राम रोज़ पढ़ता है।
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भूत काल – मैं पढ़ा।
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अपूर्ण भूत → राम पढ़ रहा था।
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पूर्ण भूत → राम पढ़ चुका था।
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भविष्यत् काल – मैं पढ़ूँगा।
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साधारण भविष्यत् → राम पढ़ेगा।
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पूर्ण भविष्यत् → राम पढ़ चुका होगा।
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📌 टिप्स –
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“हूँ/है/हो” = वर्तमान।
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“था/थे” = भूत।
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“गा/गी/गे” = भविष्य।
6️⃣ वृत्ति (Mood)
👉 परिभाषा – क्रिया में छिपी भावना या उद्देश्य।
🔹 प्रकार
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वाच्यार्थक/वर्णनात्मक (Indicative Mood) – तथ्य/वर्णन।
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राम पढ़ता है।
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आज्ञार्थक (Imperative Mood) – आदेश/अनुरोध/निषेध।
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जाओ, आओ, मत बोलो।
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विधिलिङ्ग/संभावना (Subjunctive Mood) – इच्छा/संभावना।
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काश! मैं जीत जाऊँ।
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वह आ सकता है।
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📌 टिप्स –
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“मत बोलो” → आज्ञार्थक।
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“हो सकता है” → संभावना।
7️⃣ पक्ष (Aspect)
👉 परिभाषा – क्रिया की पूर्णता/अवधि को स्पष्ट करना।
🔹 प्रकार
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संपन्न पक्ष (Perfective) – कार्य पूरा हो चुका।
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राम ने भोजन कर लिया है।
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अपूर्ण पक्ष (Progressive/Continuous) – कार्य चल रहा।
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राम पढ़ रहा है।
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सामान्य पक्ष (Habitual) – आदत/नित्य क्रिया।
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राम रोज़ स्कूल जाता है।
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📌 टिप्स –
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“रहा है” = अपूर्ण पक्ष।
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“चुका है” = संपन्न पक्ष।
8️⃣ वाच्य (Voice)
👉 परिभाषा – वाक्य में कर्त्ता और कर्म की प्रधानता।
🔹 प्रकार
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कर्तृवाच्य (Active Voice) – कर्त्ता प्रधान।
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राम ने पत्र लिखा।
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कर्मवाच्य (Passive Voice) – कर्म प्रधान।
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पत्र राम द्वारा लिखा गया।
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भाववाच्य (Impersonal/Abstract Voice) – केवल कार्य या भाव प्रधान।
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पत्र लिखा गया।
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यहाँ धूम्रपान करना मना है।
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📌 टिप्स –
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“द्वारा” शब्द हो = कर्मवाच्य।
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आदेश/निषेध वाक्य = भाववाच्य।
🔹 एक नज़र में (Quick Summary Table)
| कोटि | परिभाषा | प्रकार/भेद | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| परसर्ग | संज्ञा के बाद आने वाले शब्द | का, को, से, पर, में | राम का घर |
| लिंग | जातिगत भेद | पुल्लिंग, स्त्रीलिंग | लड़का–लड़की |
| वचन | संख्या का बोध | एकवचन, बहुवचन | किताब–किताबें |
| पुरुष | क्रिया और कर्ता का संबंध | प्रथम, मध्यम, उत्तम | मैं, तुम, वह |
| काल | समय का बोध | वर्तमान, भूत, भविष्य | पढ़ता हूँ, पढ़ा, पढ़ूँगा |
| वृत्ति (Mood) | कार्य का भाव | वर्णनात्मक, आज्ञार्थक, संभावना | वह पढ़ता है, जाओ, काश! |
| पक्ष (Aspect) | कार्य की पूर्णता/अवधि | संपन्न, अपूर्ण, सामान्य | खा लिया, खा रहा है, जाता है |
| वाच्य (Voice) | कर्ता-कर्म की प्रधानता | कर्तृ, कर्म, भाव | राम ने लिखा, लिखा गया |


