विकास परियोजनाएँ
(Development Projects)
1. परिचय
राजस्थान → भारत का सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल ~10.4%)।
यहाँ का भौगोलिक परिदृश्य विविध है → पश्चिम में थार रेगिस्तान, मध्य में अरावली, पूर्व में उपजाऊ मैदान।
राज्य में विकास हेतु विभिन्न सिंचाई, ऊर्जा, औद्योगिक, शहरी, सड़क व खनिज परियोजनाएँ चलाई गईं।
उद्देश्य → कृषि उत्पादन में वृद्धि, औद्योगिक विकास, जल संकट का समाधान, रोजगार सृजन व जीवन स्तर में सुधार।
2. सिंचाई व जल संसाधन परियोजनाएँ
(क) इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP)
प्रारंभ: 1958, नामकरण 1984।
विश्व की सबसे बड़ी नहर आधारित सिंचाई परियोजनाओं में से एक।
क्षेत्र: श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर।
महत्व → मरुस्थल में हरियाली, गेंहू व कपास उत्पादन।
(ख) चंबल घाटी परियोजना
संयुक्त परियोजना (राजस्थान + मध्यप्रदेश)।
बाँध: गाँधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर, कोटा बैराज।
योगदान → कोटा थर्मल पावर हेतु जल आपूर्ति, सिंचाई, पेयजल।
(ग) माही बजाज सागर परियोजना
स्थान: बांसवाड़ा।
कार्य: जलविद्युत + सिंचाई।
(घ) बिसलपुर बाँध परियोजना
स्थान: टोंक।
जयपुर शहर की जलापूर्ति का मुख्य स्रोत।
(ङ) अन्य प्रमुख परियोजनाएँ
जवाई बाँध (पाली) → सिंचाई व पेयजल।
मेज नदी परियोजना (भीलवाड़ा)।
बनास नदी परियोजना (राजसमंद)।
3. ऊर्जा विकास परियोजनाएँ
(क) सौर ऊर्जा
राजस्थान = भारत का “Solar Capital”।
भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर) → विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क (~2245 MW)।
नीति: राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019 (30 GW लक्ष्य)।
(ख) पवन ऊर्जा
मुख्य क्षेत्र: जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर।
राजस्थान की हिस्सेदारी ~12% राष्ट्रीय पवन ऊर्जा उत्पादन में।
(ग) थर्मल ऊर्जा
कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन (1240 MW)।
सूरतगढ़ थर्मल पावर।
कालीसिंध (झालावाड़)।
(घ) जलविद्युत
चंबल घाटी, माही बजाज सागर।
(ङ) पेट्रोलियम व गैस
बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना (HPCL-Mittal Energy Ltd.)।
मंगला-भाग्यम-आशा तेलक्षेत्र (बाड़मेर) से उत्पादन।
4. औद्योगिक व खनिज परियोजनाएँ
RIICO (Rajasthan State Industrial Development and Investment Corporation) द्वारा औद्योगिक क्षेत्र।
नीमराना (अलवर) SEZ → जापानी निवेश।
DMIC (Delhi-Mumbai Industrial Corridor) → राजस्थान में ~40% हिस्सा।
DFC (Dedicated Freight Corridor) → औद्योगिक उत्पादन को तेज़ी से बाजारों तक पहुँचाना।
(क) खनिज परियोजनाएँ
जिंक → उदयपुर, राजसमंद (HZL)।
तांबा → खेतड़ी (झुंझुनू)।
संगमरमर → मकराना, किशनगढ़।
सीमेंट उद्योग → चित्तौड़गढ़, नागौर, पाली।
5. शहरी विकास परियोजनाएँ
स्मार्ट सिटी मिशन → जयपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा।
AMRUT योजना → शहरी जल व सीवरेज प्रबंधन।
जयपुर मेट्रो रेल परियोजना → प्रथम चरण (Mansarovar- Chandpole)।
हाउसिंग परियोजनाएँ → PMAY-Urban।
6. सड़क व परिवहन परियोजनाएँ
भारत माला परियोजना → पश्चिमी व पूर्वी राजस्थान को जोड़ा।
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) → जल संकट समाधान हेतु।
जयपुर-कोटा-उदयपुर एक्सप्रेसवे → राज्य के औद्योगिक शहरों को जोड़ना।
DFC + DMIC → राजस्थान को “Logistics Hub” बनाना।
7. विशेष विकास परियोजनाएँ
राजस्थान लघु सिंचाई परियोजनाएँ → चेक डैम, तालाब निर्माण।
राजस्थान खनिज नीति → खनन आधारित उद्योगों को बढ़ावा।
Renewable Energy Hub → सौर, पवन ऊर्जा निवेश को आकर्षित करना।
Tourism Projects → हेरिटेज संरक्षण, ईको-टूरिज्म।
8. चुनौतियाँ
जल संकट व भूजल दोहन।
पश्चिमी राजस्थान का मरुस्थलीकरण।
औद्योगिक असमानता (पूर्वी vs पश्चिमी राजस्थान)।
खनन से पर्यावरण प्रदूषण।
योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार व देरी।
9. भविष्य की संभावनाएँ
IGNP व ERCP से जल संकट का समाधान।
Renewable Energy में Rajasthan = “भारत का Green Hub”।
DMIC व DFC से औद्योगिक निवेश।
पर्यटन क्षेत्र से रोजगार सृजन।
IT/स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार।
10. त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
सिंचाई → IGNP, चंबल, माही, बिसलपुर।
ऊर्जा → भड़ला सोलर, जैसलमेर पवन, कोटा थर्मल, बाड़मेर रिफाइनरी।
उद्योग → DMIC, RIICO, खनिज उद्योग।
शहरी → स्मार्ट सिटी, AMRUT, जयपुर मेट्रो।
सड़क → भारत माला, ERCP, DFC।
चुनौतियाँ → जल संकट, औद्योगिक असमानता।
संभावनाएँ → Green Energy, Tourism, IT।


